कठुआ गैंग रेप और हत्या केस के दरिंदों को सींखचों के पीछे पहुँचाने वालों के खिलाफ ही FIR के आदेश ??

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इस फोटो को सभी पहचानते हैं कभी मीडिया में इनके कामों की प्रशंसा के पुल बांधे गए थे, ये हैं DSP श्वेताम्बरी शर्मा जो कठुआ गैंगरेप के लिए गठित SIT की एक मात्र महिला अफसर थीं, जो IGP आलोक पुरी और सैयद अहफदुल मुजतबा की अगुवाई में काम कर रही थी। कठुआ गैंग रेप और हत्या केस में डीएसपी श्वेताम्बरी शर्मा ने बड़े दबावों में बीच काम किया था।

The Quint को दिए एक इंटरव्यू में DSP श्वेताम्बरी शर्मा ने तब बताया था कि “उस आठ साल की मासूम बच्ची के रेप और हत्या में शामिल लोगों, उनके रिश्तेदारों और उनसे सहानुभूति रखने वालों, जिनमें बड़ी संख्या में वकील भी शामिल थे, उन्होंने इस केस की जांच को बाधित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वो लोग हमें परेशान करने के लिए अपनी पूरी हद तक गए, लेकिन हम इस केस की जांच में आखिर तक मजबूती से खड़े रहे। तमाम बड़ी मुश्किलों और बाधाओं के बावजूद हम लोगों ने केस की जांच जारी रखी। कई बार हमें निराशा हुई, खासकर उस वक्त जब हमें पता चला कि हीरानगर पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों को भी इस मामले को दबाने के लिए रिश्वत दी गई और उन्होंने सबूतों को नष्ट करने के लिए उस मासूम बच्ची के कपड़े तक धो दिए थे।”

आगे उन्होंने बताया कि “इस मामले में ज्यादातर आरोपी मेरी ही जाति के थे, इसलिए उन्होंने विशेष रूप से मुझे प्रभावित करने की कोशिश की। उन लोगों ने अलग-अलग तरीकों से मुझ तक ये बात पहुंचाई कि देखो हम एक ही धर्म और एक ही जाति के हैं, इसलिए मुझे उन्हें एक मुस्लिम लड़की के बलात्कार और हत्या का दोषी नहीं बनाना चाहिए। मैंने उन्हें बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी के रूप में, मेरा कोई धर्म नहीं है और मेरा एकमात्र धर्म मेरी पुलिस की वर्दी है।”

“जब उन लोगों की ये सारी रणनीतियां काम नहीं आईं तो उनके परिवार और उनसे सहानुभूति रखने वाले लोगों ने जांच को प्रभावित करने के लिए ब्लैकमेलिंग और धमकी का सहारा लिया। उन्होंने लाठियां चलाईं, नारे लगाए, तिरंगे के नीचे रैलियां कीं, गांवों में अलग-अलग सड़कों पर हमारा रास्ता रोका और आखिरकार कोर्ट में भी हमें रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद हम लोगों ने पूरी दृढ़ता और धैर्य के साथ अपने काम को अंजाम दिया। इस केस में सबसे भयावह वक्त तब आया, जब मुझे सभी आरोपियों से उस बच्ची के बलात्कार और हत्या के बारे में पूछताछ करनी पड़ी, जो मेरे अपने बच्चे की उम्र की थी।’

अब The Indian Express की खबर है कि इन्साफ दिलाने में अहम् भूमिका दिलाने वाली इस SIT टीम के खिलाफ ही जम्मू कश्मीर की एक अदालत ने DSP श्वेताम्बरी शर्मा सहित कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले की जांच करने वाले विशेष जांच दल (SIT) के छह सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इन सभी पर फ़र्ज़ी गवाह तैयार करने, उन्हें ग़ैरक़ानूनी ढंग से हिरासत में रखने और झूठे बयान देने के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए है।

दरअसल Indian Express के अनुसार कठुआ और सांबा जिलों के रहने वाले सचिन शर्मा, नीरज शर्मा और साहिल शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि जम्मू के पक्का दंगा पुलिस थाने में 24 सितंबर को दर्ज की गई उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जुडिशियल मजिस्ट्रेट प्रेम सागर ने याचिकाकर्ताओं सचिन शर्मा, नीरज शर्मा और साहिल शर्मा की याचिका पर जम्मू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को निर्देश देते हुए कहा कि इन छह लोगों के खिलाफ संज्ञेय अपराध बनता है।

कठुआ गैंगरेप और हत्या केस शुरू से ही दक्षिणपंथी हिन्दू संगठनों की नाक का सवाल बना हुआ है, और इसी के चलते न्याय दिलाने के लिए आगे आये लोगों को भरी दबाव का सामना करना पड़ा है, इसी कड़ी में वकील दीपिका सिंह राजावत और मुबीन फ़ारूक़ी भी कठुआ गैंगरेप के आरोपियों के समर्थकों के निशाने पर आये थे, उन्हें धमकियाँ दी गयीं थी।

इसी SIT के सदस्यों की मेहनत की बदौलत इस साल जून में पठानकोट की विशेष अदालत ने कठुआ गैंगरेप और मर्डर केस में अपना फैसला सुनाते हुए 7 आरोपियों में से 6 को दोषी माना था और एक आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने सांझी राम, परवेश दोशी और दीपक खजुरिया को उम्रकैद की सजा सुनाई थी जबकि हेड कांस्टेबल तिलकराज, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता और स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) सुरेंद्र वर्मा को 5-5 साल की कैद और 50-50 हजार रुपए के जुर्माने की सजा दी थी।

SIT सदस्यों के खिलाफ FIR कराने की नीति भी उसी कड़ी का एक हिस्सा है, जब ये लोग इन इन्साफ दिलाने वाले बहादुर लोगों का हौंसला नहीं तोड़ पाए तो इस तरह से उन्हें हतोत्साहित करने और बदनाम की चालें चलना शुरू की हैं, एक मासूम बच्ची के बलात्कारियों को बचाने के लिए कुटिल ताक़तें अभी भी जुटी हुई हैं, और इन्साफ को कुचलने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, ये वही कुटिल ताक़तें हैं जो शहीद हेमंत करकरे को ही शहीद कहने से परहेज़ करती हैं, उनका अपमान करती हैं, गाँधी जयंती के दिन बापू का अपमान करती हैं, ऐसे में पुलिस तथा न्यायलय का भी कर्तव्य बनता है कि कोई भी अपराधी बच कर नहीं निकलना चाहिए।

उम्मीद है कि सत्य की जीत होगी और SIT सदस्य इस कुटिल चक्रव्यूह को भेदकर सगर्व बाहर निकलेंगे।

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