फ़्रांस में सार्वजनिक जगह पर बुर्का पहनने पर 2012 में दो महिलाओं पर जुर्माना लगाए जाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने महिला अधिकारों का हनन करार देकर आलोचना की है। साथ ही उन दोनों महिलाओं को मुआवजा देने और बुर्का बैन कानून की समीक्षा की बात कही है।

 Al Jazeera की खबर के अनुसार 2010 में बने क़ानून के तहत ही दो महिलाओं पर ये जुर्माना लगाया गया था, उन दोनों महिलाओं ने 2016 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति में शिकायत दर्ज की थी।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति का कहना है कि ये न सिर्फ महिला अधिकारों का हनन है बल्कि लोगों की धार्मिक आस्था और मौलिक अधिकारों का भी हनन है, फ़्रांस सरकार ये स्पष्ट नहीं कर पायी है कि उसने किस आधार पर ये बैन लगाया था।

फ्रांस सरकार को तीन माह के भीतर इस मसले पर अपना जवाब और उन दोनों महिलाओं को हर्जाना देना होगा।

फ़्रांस पहला देश है जिसने बुर्क़े/हिजाब पर बैन लगाया था, इसकी अवहेलना करने पर $170 डॉलर जुर्माना देना होता है, फ़्रांस के इस क़ानून के बाद अन्य यूरोपियन देशों ने भी इसी तरह के बैन लागू करना शुरू कर दिए जिसमें डेनमार्क, बेल्जियम, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, बुल्गारिया और और स्विट्ज़रलैंड हैं।

इस तरह के बैन के बाद विश्व व्यापी बहस छिड़ी गयी थी, अब जबकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने दो फ़्रांसिसी मुस्लिम महिलाओं को हर्जाना देने के आदेश देने के साथ इस क़ानून पर ऊँगली उठायी है तो फिर से ये मुद्दा विश्व व्यापी बहस का आधार बनने वाला है, वहीँ लोग इसे यूरोपीय मुस्लिम महिलाओं की जीत के तौर पर भी देख रहे हैं।