55 लाख की आबादी वाले देश फ़िनलैंड को 2018 के संयुक्त राष्ट्र हैप्पीनेस इंडैक्स में पहला स्थान मिला है, मोबाइल बनाने की प्रसिद्ध कंपनी नोकिया और एंग्री बर्ड्स (Angry Birds) बनाने वाली कंपनी रोवियो(Rovio) फिनलैंड की ही कंपनियां हैं, ये देश विश्व में कई बातों को लेकर आदर्श है, जिसमें इसकी शिक्षा व्यवस्था विशेष चर्चित है।

यहां प्रति वर्ग किलोमीटर में लगभग 18 आदमी रहते हैं जो यूरोपियन यूनियन में सबसे कम हैं, यहां ठंड ज्यादा रहती है. इसके बाद भी यहां मौसम सुहाना और मनमो‍हक रहता है। गर्मियों के समय रात बा‍रह बजे के बाद कुछ अंधेरा होता है, जबकि ठंड के वक्‍त दिन में अधिकांश अंधेरा होता है दोपहर में कुछ समय के लिए सूरज देव के दर्शन हो पाते है।

फिनलैंड की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत है, फिनलैंड के बैंक दुूनिया के सबसे दमदार माने जाते हैं. हालांकि यहां की GDP कम है, ये दुनिया का अकेला देश होगा, जहां कोई बेघर नहीं है।

ये दुनिया के सबसे विकसित देशों में है. जहां हर नागरिक को आर्थिक सुरक्षा, भत्तों के साथ कई ऐसे अधिकार और सुविधाएं हासिल हैं कि उन्हें कभी ये नहीं सोचना पड़ता कि उनकी नौकरी चली गई तो क्या होगा। ये सारा जिम्मा सरकार उठाती है. हालांकि यहां लोगों की आमदनी काफी है।

फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था पूरी दुनिया में सबसे अच्छी मानी जाती है. फिनलैंड में बच्चे लगभग 6 से 7 साल की उम्र में स्कूल जाना शुरु करते हैं।

फिनलैंड की इस शैक्षणिक सफलता की धूम मची है। इसका राज जानने के लिए वहां के शिक्षाविदों और शिक्षा-प्रशासकों को अन्य देशों में बुलाया जा रहा है और दूसरे देशों से शिक्षाविदों की सैकड़ों टोलियां फिनलैंड जा रही हैं। वह एक तरह से शिक्षा का तीर्थ बन गया है।

फिनलैंड के इस शैक्षणिक चमत्कार के पीछे कारण भी गजब के हैं। वहां एक भी निजी स्कूल नहीं है और पूरी शिक्षा सरकारी खर्च पर होती है। अमीर-गरीब, तेज-कमजोर बच्चे बिना भेदभाव के एक ही कक्षा में पढ़ते हैं। स्कूल में पहले छह बरस तक कोई होमवर्क नहीं दिया जाता और कोई परीक्षा या टेस्ट नहीं होते।

हमारे यहां जैसी बोर्ड की सामान्य परीक्षा सिर्फ एक होती है, बच्चों के सोलह बरस के होने पर। उसमें भी कोई प्रावीण्य सूची नहीं बनती। सारे स्कूली शिक्षक स्नातकोत्तर होते हैं और उनका वेतन भी देश के अन्य प्रतिष्ठित व्यवसायों से कम नहीं होता। फिनलैंड में उच्च शिक्षा भी पूरी तरह मुफ्त है।

भारत को फ़िनलैंड की इस एजुकेशन सिस्टम से कुछ सीख लेनी चाहिए. आइये जानते हैं यहाँ के एजुकेशन सिस्टम में और क्या खास है:-

1. फ़िनलैंड के बच्चे 7 साल की उम्र तक स्कूल नहीं जाते.
2. स्कूल के पहले 6 साल तक बच्चों की क्षमता और नॉलेज को जांचने के लिए कोई मार्क्स या ग्रेड सिस्टम नहीं है.
3. स्कूलिंग के सभी वर्षों में सर्फ एक बार ही एग्जाम लिया जाता है.
4. ये एग्जाम तब होता है जब छात्र 16 साल का हो गया हो.
5. एलेमेन्ट्री स्कूलों में हर हफ्ते कुल 20 घंटे की पढ़ाई होती है. मतलब एक दिन में चार घंटे. इसके साथ कोई होमवर्क भी नहीं मिलता.
6. हर क्लास के बाद स्टूडेंट्स को 15 मिनट का ब्रेक मिलता है.
7. इन छात्रों को 75 मिनट का इंटरवल मिलता है जिसमे ये लंच खाने के अलावा भी अपनी मर्ज़ी से कुछ और भी कर सकते है.
8. फ़िनलैंड के स्कूल सिस्टम 100 % स्टेट फंडेड होते हैं
9. यहाँ के टीचर्स को भी एक दिन में सिर्फ 4 घंटे ही पढ़ना होता है.
10. फ़िनलैंड में टीचर्स की सैलरी भी बहुत अच्छी होती है. इन्हें डॉक्टर या इंजीनियर से कम नहीं माना जाता.

कुछ दशक पहले, सत्तर के दशक में, फिनलैंड में शिक्षा की हालत इतनी अच्छी नहीं थी। तब उन्होंने इसे सुधारने के लिए तय किया कि हर बच्चे को शिक्षा का समान अवसर मिलना चाहिए, चाहे उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति या रहने का स्थान जो भी हो। उनका उद्देश्य उत्कृष्टता नहीं, समानता था। उत्कृष्टता तो उन्हें बोनस में मिल गई।

जब 2001 में पीसा-सर्वेक्षण में फिनलैंड पहले नंबर पर आया तो बहुत से फिनलैंडवासियों को विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने सोचा कि शायद सर्वेक्षण के आकलन में कोई गलती हो गई होगी। पर उसके बाद फिनलैंड के लगातार अव्वल रहने से एक ही बात साबित होती है शैक्षणिक उत्कृष्टता का रास्ता भी ‘समानता’ से होकर जाता है। प्रतिस्पर्धा, होड़ और चयन की जगह सहयोग, समानता और सबको आगे लाने पर जोर ही सबसे अच्छे नतीजे दे सकता है।

कहने वाले कह सकते हैं कि फिनलैंड और भारत की परिस्थितियां काफी अलग हैं। वह एक अमीर देश है, भारत एक गरीब देश। तब हमें तीसरी दुनिया के कुछ देशों की सफलताओं पर गौर करना चाहिए। जैसे क्यूबा वह देश है जिसने साक्षरता और शिक्षा के वे लक्ष्य आधी सदी पहले हासिल कर लिए थे, जिन्हें ‘सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों’ के नाम से इन दिनों भारत सहित दुनिया के गरीब देशों के सामने रखा जा रहा है।

(अगले भाग में क्यूबा और उसकी शिक्षा पद्धति के बारे में)

 

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