कोरोना महामारी के बीच भारत का इज़राइल के साथ 880 करोड़ के हथियारों का सौदा।

देश में कोरोना महामारी ने दस्तक दी हुई है, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोना को महामारी घोषित करने और भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने के बाद भी भारत सरकार और इज़राइल के बीच पहले से जारी एक हथियारों के सौदे पर हस्ताक्षर किये गए हैं।

Middle East Eye की खबर के अनुसार रक्षा मंत्रालय ने पिछले गुरुवार को 16,479 इजरायल से नेगेव लाइट मशीन गन (LMG) की खरीद के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मंजूरी के बाद 880 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए।

इस सौदे के तहत इजरायल भारत को इजरायल वेपंस इंडस्ट्रीज (IWI) द्वारा निर्मित 16,479 नेगेव 7।62×51 मिमी लाइट मशीन गन उपलब्ध कराएगा, IWI का कारखाना इज़राइल के रमत हशरन शहर में है।

हस्ताक्षर किए गए हथियार अनुबंध को मूल रूप से फरवरी 2018 में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा अधिकृत किया गया था, और प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और नरेंद्र मोदी की मुलाक़ात के समय दोनों देशों के बीच हथियार समझौतों की एक कड़ी का हिस्सा है।

कोरोना महामारी के चलते भारत में मास्क, वेंटिलेटर्स और स्वास्थ्य उपकरणों की कमी की बात उठ रही है, देश में कोरोना संक्रमित मरीज़ों और मौतों का आंकड़ा बढ़ ही रहा है। इज़राइल के साथ 880 करोड़ के हथियारों के सौदे को फाइनल किये जाने पर सामाजिक कार्यकर्ता सवाल उठाने लगे हैं उनका कहना है कि ऐसे में कोरोना महामारी से निबटने के लिए मास्क, वेंटिलेटर्स और आवश्यक स्वास्थ्य उपकरणों की पूर्ती पहली प्राथमिकता होना चाहिए थी।

दिल्ली विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय संबंध और वैश्विक राजनीति के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर अचिन वणिक ने सरकार के इस क़दम को घोर निंदनीय बताते हुए कहा है कि अधिकारियों और सरकार को इस विपत्ति की गंभीरता पता होने के बावजूद एहतियाती क़दम नहीं उठाये जा रहे।

उन्होंने मिडिल ईस्ट आई से कहा कि, “भारत को 130 करोड़ की सघन आबादी वाले लोगों के देश में फ़ैली कोरोना वायरस महामारी के बहुत बड़े खतरे से निपटने के लिए पाई पाई की ज़रुरत पड़ेगी। वजह कि यूरोप, अमेरिका, चीन और एशिया के अन्य देशों की अपेक्षा इस आपात स्थिति से निपटने के लिए यहां की चिकित्सा व्यवस्था बेहद कमज़ोर है।

लेकिन महामारी के बीच हथियारों की खरीद समझौते पर हस्ताक्षर पर दिल्ली विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर अपूर्वानंद मोदी सरकार के इस क़दम का समर्थन करते हुए कहते हैं कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा इजरायल की तरह भारत को एक सुदृढ़ राज्य में बदलने के बड़े प्रयास का हिस्सा है।

वहीँ दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नेता कविता कृष्णन ने मिडिल ईस्ट आई को बताया कि सरकार ने अभी तक उन लोगों के लिए किसी राहत पैकेज की घोषणा नहीं की है, जो महामारी के परिणामस्वरूप अपनी आजीविका खो रहे हैं, सैन्य खरीद पर भारी मात्रा में खर्च करने का विकल्प चुनना निंदनीय है।

कविता कृष्णन न पूछा “भारत सरकार एक कोरोना रिलीफ पैकेज, मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर, मुफ्त हेल्थकेयर और अभी सभी के लिए परीक्षण को प्राथमिकता देने के बजाय सैन्य खरीद पर भारी मात्रा में खर्च करने का विकल्प क्यों चुन रही है ?”

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