सीरियाई शरणार्थी हसन और कनाडाई महिला की दिल को छू लेने वाली कहानी।

सीरियाई शरणार्थी हसन और कनाडाई महिला की दिल को छू लेने वाली कहानी।
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दाढ़ी वाले इस व्यक्ति का नाम है हसन अल कोंतर जो कि सीरियन नागरिक हैं, ये युद्ध की मार झेल रहे सीरिया से भाग कर मार्च 2018 में मलेशिया आये थे, और फिर वहीँ एयरपोर्ट पर 8 महीने फंसे रहे।

The Guardian की खबर के अनुसार 37 साल के हसन अल कोंतर जब सीरिया से भाग कर मलेशिया आये तो एयरपोर्ट के अधिकारीयों ने उन्हें आगे किसी भी फ्लाइट में चढ़ने नहीं दिया और उन्हें वापस सीरिया डिपोर्ट करने लगे, मगर हसन अल कोंतर ने वापस सीरिया जाने से इंकार कर दिया।

हसन अल कोंतर ने मलेशिया एयरपोर्ट के अराइवल कॉरिडोर में आठ महीने गुज़ारे, वो एयरपोर्ट पर दान दिए गया खाना खाते थे, वहां के बाथरूम में नहाते धोते थे, हसन अल कोंतर ने अपना दुःख सोशल मीडिया पर वीडियोज़ के ज़रिये शेयर किया तो दुनिया का ध्यान उनकी ओर गया।

सोशल मीडिया पर उनकी दुखभरी कहानी देखकर उनकी फॉलोविंग बढ़ती गयी, लोग उनकी कहानी शेयर करने लगे, व्हिसलर (कनाडा) में मीडिया रिलेशन कंसलटेंट लॉरी कूपर नाम की एक महिला उनकी मदद को आगे आईं।

उन्होंने हसन अल कोंतर से संपर्क कर अपने मित्रों का एक ग्रुप बनाकर कनाडा के अप्रवासी मंत्री को एक हसन को शरण देने की पिटीशन दी और साथ ही में हसन की आर्थिक मदद के लिए क्राउड फंडिंग के ज़रिये $13,600 डॉलर्स की राशि भी जुटाई।

उनकी मेहनत से कनाडा के अप्रवासी मंत्रालय ने हसन को शरण देने के लिए सहमति दे दी।

मगर तभी उन्हें पता चला कि मलेशिया ने हसन को गिरफ्तार कर वापस सीरिया भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

लॉरी कूपर ने वकीलों और कंसल्टेंट्स की सहायता से हसन के डेपोर्टेशन को रोका, और उन्हें कामयाबी मिली, आखिर कार इतवार को हसन ने मलेशिया एयरपोर्ट को अलविदा कहा और कनाडा के लिए उड़ चले, हसन सोमवार को कनाडा की ज़मीन पर उतरे तो वहां न सिर्फ लॉरी कूपर बल्कि एक नयी सुबह और सुनहरा भविष्य उनका इंतज़ार कर रहे थे।

हसन की मदद के लिए कनाडा में लॉरी कूपर के साथ वहां के दो और संगठनों, द ब्रिटिश कोलंबिया मुस्लिम एसोसिएशन और कनाडा केयरिंग सोसाइटी भी उनकी मदद को आगे आये हैं।

जब वो कनाडा एयरपोर्ट पर उतरे तो लॉरी कूपर ने उन्हें गले लगा लिया, उनका ये फोटो अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में छाया हुआ है, ये सिर्फ एक फोटो ही नहीं है, एक दिल को छू लेने वाली कहानी है, मज़हब, भाषा, जाति, देश, रंग, नस्ल और सरहदों के पार सिर्फ इंसानियत की।

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