अमरीका के अर्कांसस राज्य के एक कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर उमर अतीक की मानवीयता की दुनिया में गर्मजोशी से तारीफ हो रही है जिसने नववर्ष के मौके पर अपने 200 कैंसर मरीज़ों के $650,000 डॉलर के बिल माफ़ कर दिए।

Headtopics की खबर के अनुसार अमेरिकी मुस्लिम डॉक्टर उमर अतीक ने नए साल की पूर्व संध्या पर उन सभी 200 कैंसर रोगियों की चिकित्सा फीस माफ़ करने का फैसला किया, जो अपनी बीमारी के बिलों का भुगतान करने में असमर्थ थे।

पाकिस्तानी मूल के डॉक्टर उमर अतीक ने 1991 में पाइन ब्लफ में जाने से पहले न्यूयॉर्क शहर के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर में अपनी फैलोशिप पूरी की, बाद में उन्होंने अर्कांसस कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना की।

अतीक ने एक साक्षात्कार में कहा, “हमने सोचा कि कोरोना महामारी के दौरान ऐसा करने के लिए बेहतर समय था, इस महामारी ने कई घरों, लोगों के जीवन और व्यवसायों और उद्योग धंधों को बर्बाद कर दिया है। हमने सोचा था कि हम अपने मरीज़ों के लिए ऐसा कर सकते हैं, और हम चाहते भी थे, इसलिए हम आगे बढ़े और यह किया।”

अपने सभी 200 कैंसर मरीज़ों को लिखी चिठ्ठी में उन्होंने लिखा ” “मुझे उम्मीद है कि यह पत्र आप तक पहुँच जाएगा। अर्कांसस कैंसर क्लिनिक को अपने मरीज़ों की सेवा करने पर गर्व था। यद्यपि विभिन्न स्वास्थ्य बीमा कम्पनियाँ अधिकांश रोगियों के अधिकांश बिलों का भुगतान करती हैं, मगर दुर्भाग्य से अमरीका का हेल्थ केयर सिस्टम महंगा है, लोग बिलों के भुगतान और बीमे की किस्तों से परेशान रहते हैं। अर्कांसस कैंसर क्लिनिक समुदाय को समर्पित सेवा के 29 से अधिक वर्षों के बाद अपना अभ्यास बंद कर रहा है। क्लिनिक ने अपने रोगियों द्वारा क्लिनिक के लिए बकाया सभी शेष राशि को वापस लेने का फैसला किया है। आप सभी की छुट्टियां आनंददायक हों।”

डॉक्टर उमर अतीक का कहना है कि यह साल विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रहा है और ऐसी चुनौती में उन्हें अपने रोगियों की आर्थिक रूप से मदद करने में खुशी मिली है।

अतीक ने कहा, “बीमार होना बुरा है, कैंसर होना और बुरा है और इस कोरोना महामारी में कैंसर होना विनाशकारी है। मैं उनसे (अपने मरीज़ों) प्यार करता हूं, मैं उनकी परवाह करता हूं, और मुझे खुशी है कि मैं उनके लिए अपनी तौर पर ये थोड़ा सा करने में सक्षम था।”

इस्लाम का एक स्तंभ ज़कात या दान सभी मुसलमानों के लिए एक धार्मिक दायित्व है जो इसके मानदंडों को पूरा करते हैं। यह एक अनिवार्य धर्मार्थ योगदान है।

अनिवार्य ज़कात के अलावा, इस्लामिक शरीयत वैकल्पिक दान में देने को प्रोत्साहित करती है जिसे सदक़ा कहा जाता है।

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