अमरीका-वियतनाम युद्ध की बर्बरता की प्रतीक ‘नेपाम गर्ल’ के फोटो के पीछे की कहानी।

अमरीका-वियतनाम युद्ध की बर्बरता की प्रतीक ‘नेपाम गर्ल’ के फोटो के पीछे की कहानी।
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सड़क पर वस्त्रहीन रोती, चीखती, भागती हुई 9 साल की नन्ही वियतनामी बच्ची के इस फोटो ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। अमरीका ने 8 जून 1972 को वियतनाम के एक गांव त्रांग बांग पर नेपाम बमों से हमला किया था, नेपाम बमों से आसमान से आग बरस रही थी, उसी गांव की एक बच्ची नेपाम बम की आग से झुलस गई थी।

वो अपने जलते हुए कपडे फाड़ कर वस्त्रहीन अवस्था में दर्द से बेहाल चीखती चिल्लाती सड़क पर निकल आई, उसी समय वहां मौजूद युद्ध रिपोर्टर निक उट मौजूद थे उन्होंने उस नेपाम बम की आग से जली हुई उस भागती हुई बच्ची का फोटो खींच लिया। उस बच्ची का नाम था किम फुक फान थी।

जब ये फोटो प्रकाशित हुआ तो दुनिया में तहलका मच गया, अमरीकी बर्बरता के प्रतीक इस फोटो के लिए वार फोटोग्राफर निक उट को पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित किया गया। और इसी फोटो की वजह से अमरीकी जनता की सोच में बदलाव भी आया।

किम फुक फान थी अब 56 वर्ष की हो चुकी हैं, वो कहती हैं कि “मैं उस तस्वीर से बचती हूँ, शुरू में वो बाहर निकलने से डरती थीं, मगर बाद में उन्होंने प्रण किया कि वो शांति और समाज सेवा के लिए सक्रीय होंगी। अब वो युद्धरत देशों के बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्था में काम करती हैं।

किम फुक फान थी के शरीर पर नेपाम बम से जलने के निशान अभी तक मौजूद हैं.

किम फुक फान थी की संस्था किम फाउंडेशन इंटरनेशनल ऐसे ही बच्चों के लिए अनाथालय, स्कूल्स, अस्पताल और लाइब्रेरीज बना रही है, उनके इसी काम को देखते हुए उन्हें 2019 का प्रतिष्ठित ड्रेसडेन का शांति पुरस्कार दिया गया था।

किम फुक फान थी अब कनाडा की नागरिक हैं, 1992 में क्यूबा जाते समय उनके उन्होंने और उनके पति ने कनाडा में शरण मांगी थी, 1997 में वह एक कनाडाई नागरिक बनीं और किम फाउंडेशन इंटरनेशनल की स्थापना की, जो युद्धरत देशों के बच्चों को चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करती है।

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